दोस्तों नमस्कार
भट्ठा पारसौल की आग भाग तीन में आप सभी का स्वागत है। आप लोगो से काफी दिन तक दूर रहा, क्या करू कुछ जरूरी काम में लग गया था। इस लिए कुछ लिखना पढ़ना छुट गया था। लेकिन आज समय मिला तो लिखने बैठ गया। भट्ठा पारसौल कांड का तीसरा दिन था हर जगह बस भट्ठा ही भट्ठा छाया हुआ था। हर चौक -चौराहे पर चर्चाये हो रही थी. और लोगो के होठो पर बस एक ही शब्द था वह यह कि वहां के लोगो पर बहुत जुल्म हुआ है. पुरा शासन-प्रशासन भट्ठा पारसौल में कैंप किए हुए था। नेताओं को एक मुद्दा मिल गया था, पॉलिटिक्स करने के लिए। सभी स्थानीय और केन्द्रिय नेता वहां जाना चाहते थे, सोचते थे इससे अच्छा मौका नहीं मिल पायेगा राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए। लेकिन किसी को वहां जाने की इजाज्त नहीं थी। हर जाने वाले रास्ते को पुलिस ने सिल कर दिया था। बस सभी दिल्ली में बैठ कर या दुसरे जगहों से आरोप -प्रत्यारोप लगा रहे थे। मतलब कोई वहां जा नहीं सकता था। पुलिस को डर था कि कहीं यहां जो हुआ है उसे देखने के बाद हमारी खाट खड़ी ना हो जाये।
लेकिन इसी बीच मेधा पाटेकर (एक समाजीक कार्यकर्ता) अपने कुछ सहयोगियों के साथ गांवों में लोगों से मिलने चली गयी। लोगों से मिलने के बाद और जो गांवों में हुआ था उसे देखने के बाद उनका दिल पसीज गया वो पुलिस की बर्बरता देख कर भाउक हो गयी। पुलिस के गोली के शिकार हुए राजपाल के घर पर जाकर शोक में शरीख हुई थी, धिरे-धिरे मीडिया वाले भी वहां जमा होने लगे। तब तक इस बात की खबर पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों को हो गयी। वे लोग बिना देर किये आंधी की तरह उस जगह पर आ गये जहां पर समाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटेकर उनके दुखो को बांट रही थी। लेकिन वहां सीडीओ शीतल वर्मा पहुंचने के साथ ही ऐसी पेश आयी मेधा जी के साथ मानो जैसे वह एक अपराधी हो। उन्हें जबरदस्ती वहां से उठने को कहां गया यहां तक की मैडम ने ये कहा की अगर आप नहीं उठेंगी तो हमें आप पर कार्वाई करनी पड़ेगी। सभी लोग आवाक् रह गये, ये बातें सभी को बुरी लगी। तभी हालात को समझते हुए जिले के एसडीएम विशाल सिंह ने दोनो हाथ जोड़ते हुए, बड़े अदब के साथ कुछ इस तरह से अपना परिचय दिया। मैम मेरा नाम विशाल सिंह है, मैं इस जिले का एसडीएम हूं। और मैं आप से नम्र निवेदन करता हुं कि आप यहा से चले, क्योंकि यहां के हालात अच्छे नहीं है कुछ भी हो सकता है। हम लोग चार दिनों से परेशान है। और मुझे पुरा उम्मीद है कि आप शांति बनाये रखने में हमारी सहयोग करेंगी। फिर क्या था इतना सुनते ही मेधा पाटेकर अपने सहयोगियों के साथ उठ खड़ी हुई और चलने लगी। लेकिन चलते-चलते वहां के लोगो से भी मिलने लगी।
लेकिन वहां से चलते हुए जो उन्होंने देखा वह रोंगटे खड़े करने वाले थे। मेधा जी को गांव में जाने से लोगो में एक विश्वास जगा, कि चलो कोई तो हमारी सुध लेने वाला है। मेधा जी के गांव में जाने के बाद तुरंत अस्पताल के डॉक्टर और एम्बुलेंस को प्रशासन ने बुलाया।घायल लोगो का इलाज होने लगा। लोगो में एक आशा की किरण दिखाई दी, की उनके के साथ जो भी हुआ है इसका इंसाफ उन्हें जरूर मिलेगा। समय बीता और एक दिन राहुल गांधी अपने सहयोगियों और सुरक्षा कर्मीयों के साथ सुबह के समय मोटर साइकिल पर सवार होकर चले आये। उन्होंने गांवों का मुआयना किया, और फिर पारसौल गांव में बैठ गये चौपाल पर। देखते-देखते लोगो कि भीड़ जमने लगी, और भीड़ इतनी हुई कि वहां से निकलना या आना जाना मुश्किल हो गया। जो लोग गांव छोड़ कर भागे थे फिर गांवो में आ गये दुसरे गांव के लोग भी आये हुए थे। लोग राहुल के एक झलक पाने के लिए बेकरार थे। लेकिन दोपहर के बाद राहुल गांधी वहीं के एक किसान के घर में खाना-खाने के लिए गये और फिर आराम करने लगे। इधर लोगो का हुजूम बढ़ता जा रहा था, लोग इंतजार में बैठे थे कि राहुल जी अब आयेंगे और उनका दिदार हो पायेगा। लेकिन शाम के छह बज रहे थे अभी भी वो घर में ही बैठे थे। वो अंदर से खबर भीजवा रहे थे कि लोगो को कहा जाए भट्ठा जाने के लिए मैं वही आता हुं फिर धरने पर बैठूंगा। लेकिन लोग मानने वाले कहा थे, मै भी शाम होता देख सोचा चलो ऑफिस के लिए चला जाए खबर भी लिखनी होगी। मैने अपना गाड़ी स्टार्ट किया और चल दिया, भट्ठा पहुंचने के साथ ही एक लड़का आया और कहा सरजी यहां क्या कर रहे हो, वहां चलो ओरिजनल चीजे दिखाता हुं। जिसे देखने के बाद मेरा तो होश ही ऊड़ गया, वो क्या था पता नहीं लेकिन ऐसा कहा जा रहा था कि इसी बिठौरे की आग में आदमी को जलाया गया है। जिसका जिक्र राहुल जी ने प्रधान मंत्री से मिल कर किये हैं।
मैने वहा की तस्वीर उतारी और ऑफिस के लिए भेज दिया। लेकिन वहां राहुल जी धड़ने पर बैठ गये उनके साथ बहुत लोग भी धड़ने पर बैठ गये। समय बीता रात के करीब ११ बज रहे थे ऊपर से फरमान आया राहुल को गिरफ्तार कर लिया जाये। हुआ ऐसा ही राहुल को गिरफ्तार किया गया और कासना थाने लाने के बाद डीएनडी पर ला कर छोड़ दिया गया जहां से वो अपने दिल्ली स्थित घर के लिए रवाना हो गये। हम लोग भी अपने ऑफिस लौट आये . खबरे छपी और सुबह प्रकाशित हुई....भट्ठा पारसौल में अभी और भी है जो अगले भाग में आप पढ़ेगे...
शुक्रिया....